पूर्व मंत्री भाटी के आन्दोलन पर ये क्या बोल गये:राठौड़

तहलका न्यूज,बीकानेर। विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने बीकानेर प्रवास के दौरान पत्रकारों से कहा कि प्रदेश की नाम की सरकार है किसी काम की नहीं। जिसने अपनी बजट घोषणाओं को पूरा न कर हर वर्ग परेशान है। कांग्रेस सरकार में न केवल अपराध बढ़े बल्कि किसानों से किये वादे भी पूरे नहीं किये गये। मजे की बात यह है कि राजस्थान में पूर्णकालिक गृहमंत्री नहीं है। इस सरकार ने अपराध और अपराधियों को बेखौफ किया है। प्रदेश ही नहीं बीकानेर अपराधों का गढ़ बन गया है। राठौड़ ने एक बयान में कहा कि आज भी राष्ट्रीयकृत, अधिसूचित व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से 31 मार्च 2018 तक लिए गए अवधिपार अल्पकालीन फसली ऋण नहीं चुकाने के कारण राज्य के करीब 14 लाख किसान 9 हजार करोड़ रुपए के कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं जिनके खाते भी एनपीए घोषित हो चुके हैं और वह कर्जमाफी की बाट जोह रहे हैं।
गोचर आन्दोलन भाटी का व्यक्तिगत
राठौड ने कहा कि गोचर भूमि के लिये आन्दोलन चला रहे पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी का यह आन्दोलन व्यक्तिगत है। इसको लेकर समय आने पर भाजपा विधानसभा में अपनी आवाज उठाएंगे।
वन टाइम सैटलमेंट की थोथी घोषणा—
राठौड़ ने कहा कि एक ओर सरकार 31 मार्च 2018 तक राष्ट्रीयकृत, अधिसूचित व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से लिए गए अवधिपार अल्पकालीन फसली ऋण की संपूर्ण कर्जमाफी एवं विधानसभा के तीनों बजट सत्रों में ‘Óवन टाइम सैटलमेंटÓÓ की थोथी घोषणाएं कर दम्भ भरकर किसानों को गुमराह करने में लगी हुई है वहीं दूसरी ओर धरातल पर किसानों के कर्ज की राशि पर चक्रवृद्धि ब्याज करीब 7 गुना होने से किसानों की जमीनों की नीलामी का कार्य अनवरत रूप से प्रारम्भ हो गया है जिस वजह से पीडि़त किसान व उसका परिवार आत्महत्या करने को मजबूर है।
सरकार की कलई खुली—
राठौड ने कहा कि इसी सरकार ने गोचर भूमि के रक्षक बोर्ड बनाने की बात कही थी। लेकिन सरकार अपने उस वादे पर खरी नहीं उतर रही। न ही विप्र बोर्ड का गठन हुआ। बीकानेर के लिये की गई बजटीय घोषणा को अमलीजामा पहनाने पर कोई काम नहीं हुआ। जिससे सरकार की कलई खुली है। सरकार पर मंडी टैक्स,पेट्रोल पर टैक्स,सर्वोधिक बिजली प्रदेशवासी ले रहे है। तीन मंत्री बीकानेर की घोषणाएं पूरी करवा दें तो यहां की जनता को लाभ मिलें।
नोटिस निरस्त करें—
राठौड़ ने कहा कि वर्तमान में राष्ट्रीयकृत, अधिसूचित व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से अवधिपार अल्पकालीन फसली ऋण लेने वाले लाखों किसान हैं। ऐसे में सिर्फ एक जगह ही नीलामी प्रक्रिया को निरस्त करना ऊंट के मुंह में जीरा समान कार्यवाही है। किसान हितैषी होने का ढोंग करने वाली कांग्रेस सरकार राज्य के विभिन्न जिलों में कर्ज नहीं चुका पाने के कारण जिन किसानों को जमीनें नीलाम होने का नोटिस मिला है उसे भी निरस्त कर किसानों को राहत प्रदान करनी चाहिए। क्योंकि सिर्फ दौसा ही नहीं बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसानों को जमीन नीलामी के नोटिस मिल रहे हैं जिस कारण से उनमें सरकार के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है।
कल्ला कमेटी ढाक के तीन पात रही—
राठौड़ ने कहा कि राज्य सरकार ने किसान कर्जमाफी के दक्षिणी राज्यों के मॉडल का विस्तृत अध्ययन के लिए कल्ला कमेटी बनाई गई जिसकी करीब दर्जनभर मीटिंग भी हुई। कमेटी ने इन राज्यों का दौरा भी किया लेकिन कर्जमाफी को लेकर ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत नहीं कर सकी और नतीजा ढाक के तीन पात रहा। राठौड़ ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सत्ता में आने के बाद 10 दिनों के भीतर किसान कर्जमाफी का वादा किया था लेकिन अब तक सरकार ने किसानों का कर्जमाफ नहीं किया। वहीं राज्य सरकार राष्ट्रीयकृत, अधिसूचित व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से 31 मार्च 2018 तक लिए गए अवधिपार फसली ऋण के लिए कभी लीड बैंक तो कभी केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर किसान कर्जमाफी के अपने वादे से यू टर्न ले रही है। जबकि कांग्रेस सरकार ने अपने नीतिगत दस्तावेज जनघोषणा पत्र में इसका कहीं भी उल्लेख नहीं किया था कि वह अवधिपार अल्पकालीन फसली ऋण को माफ नहीं करेगी।

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