वाह रे सिस्टम:मृतक के ही सफलता पूर्वक लगा दी दूसरी डोज

जयनारायण बिस्सा
तहलका न्यूज,बीकानेर। वैक्सीनेशन अभियान में जिला प्रदेश में अच्छा मुकाम हासिल करे इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई कसर नही छोड़ी जा रही है। स्थिति यह है कि अब फर्जी आंकड़े भी सामने आने लगे हैं। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग का एक कारनामा सामने आया है जिसमें स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने कागजों में मृत पुरूष को कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज लगा दिया। जबकि सच्चाई ये है कि पहला टीका लगने के बाद ही बुजुर्ग की मई के महीने में मौत हो चुकी है। जब मृतक के परिजन के पास कोरोना वैक्सीन लगने का मैसेज पहुंचा तो वो हैरान रह गए। जिले में कोरोना संक्रमण के बचाव के लिये जीवित व्यक्तिओं के तो टीकाकरण सुना होगा। लेकिन नौ महीने पहले कोरोना के कारण अपने प्राण गंवा चुके एक बुजुर्ग को रविवार को दूसरा डोज लगाकर सुरक्षा दी गई है। ऐसा सुनने में बड़ा अजीब और हैरान करने वाला वाक्या है। लेकिन जी हां ऐसा हुआ है। जिले के नोखा तहसील के 73 वर्षीय मदन मोहन आचार्य को कोविशील्ड की दूसरी डोज रविवार को लगाई गई है। यह वैक्सीनेशन सीएचसी नोखा में लगाया गया है। जिसका वाकयादा प्रमाण पत्र जारी करने के लिये रजिस्टेड मोबाइल नंबर पर मैसेज भी भेजा गया है।
मृतक को लगा दी दूसरी डोज!
मामला कुछ इस प्रकार है कि नोखा तहसील के मदनमोहन आचार्य का तीन मई 2021 को पीबीएम अस्पताल में कोरोना संक्रमित होने पर उपचार के दौरान निधन हो गया था। आचार्य बेटे ने बकायदा उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी बनवा लिया गया था। आचार्य के पुत्र उत्तम आचार्य के अनुसार उनके 73 वर्षीय पिता के निधन के पूर्व 15 अप्रेल 2021 को कोविशील्ड का पहला डोज लगा था और निर्धारित अवधि आने से पूर्व ही 3 मई को उनका निधन हो गया था। रविवार 16 जनवरी 2022 सितंबर को उत्तम के मोबाइल पर टेक्स मैसेज आया जिसमें उनके पिता को कोविशील्ड वैक्सीन का दूसरा डोज लगने की जानकारी थी और प्रमाण पत्र भी डाउनलोड करने का ऑप्शन था। पहले तो आशुतोष मैसेज पढ़कर हैरान रह गए और फिर उन्होंने वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट डाउनलोड कर लिया। उत्तम का कहना है कि इस तरह फर्जी तरीके से वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है जिसकी जांच होना चाहिए,संभवत:और भी लोगो के साथ ऐसा हुआ होगा।
अभियान की वास्तविकता पर उठे सवाल
मदन मोहन आचार्य के नाम से दूसरा डोज लगाए जाने का मामला सामने आने से वैक्सीनेशन अभियान की वास्तविकता पर भी सवाल उठने लगे है। यदि महाअभियान के दौरान दर्ज किए गए आंकड़ो की बाजीगरी की जांच की जाए तो कई तरह के खुलासे हो सकते है। कोरोना काल मे भी मृत्यु के आंकड़ों को लेकर भी पहले भी सवालिया निशान लग चुके हे। वैक्सीनेशन अभियान में गलत आंकड़े दर्ज कर वाहवाही लूटी जा रही है जबकि वास्तविकता कुछ ओर ही है।
वर्जन
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर बी एल मीणा से बात की गई तो उनका कहना था कि आपके माध्यम से ही जानकारी मिली है,मृतक के नाम पर वैक्सीन लगाना संभव नहीं है। कहीं न कहीं सॉफ्टवेयर की त्रुटि हो सकती है,कहां और किससे गलती हुई है पूरे मामले की जांच की जाएगी।

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