बीकानेर में कल होगा सत्य के लिये युद्ध,जाने क्यों,देखे विडियो

तहलका न्यूज,बीकानेर। अधर्म पर धर्म एवं असत्य पर सत्य की जीत का पर्व नृसिंह चतुर्दशी शनिवार को पूजा-अर्चना एवं व्रत उपासना के साथ भक्तिपूर्वक मनाई जाएगी। इस दौरान शहर में स्थित नृसिंह मंदिरों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन होंगे। निज मंदिर सहित मंदिर परिसरों क ो पुष्पों से श्रृंगारित किया गया है। दशको पुरानी परम्परा के क्रम में अनेक स्थानों पर नृसिंह-हिरण्यकश्यप लीलाओं के मंचन होंगे। नृसिंह जयन्ती को लेकर नृसिंह मंदिरों के रंग रोगन के साथ उनको भव्य रूप से सजाए जा रहे है। मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई है। वहीं जिन स्थानों पर नृसिंह -हिरण्यकश्यप लीलाओं के मंचन होंगे उन स्थानों पर साफ सफाई के साथ रंग बिरंगी पताकाएं लगाकर लीला मंचन स्थलों को सजाया जा रहा है। नृसिंह चतुर्दशी पर श्रद्धालु लोगों द्वारा व्रत उपासना की जाएगी। देर शाम को भगवान नृसिंह के प्रकट होने व हिरण्यकश्यप के वध के बाद व्रत का पारणा किया जाएगा। इस दौरान अल सुबह से देर रात मंदिरों में दर्शन पूजन का क्रम चलता रहेगा। मंदिरों में भक्ति संगीत कार्यक्रमों के आयोजन होंगे। घरों में स्थापित नृसिंह मूर्तियों का भी पूजन श्रृंगार कर आरती की जाएगी।
इन स्थानों पर होगा मंचन
नृसिंह चतुर्दशी के अवसर पर शुक्रवार को शहर में अनेक स्थानों पर नृसिंह-हिरण्यकश्यप लीलाओं के मंचन होगे। इस दौरान लखोटिया चौक,डागा चौक, लालाणी व्यास चौक, दुजारी गली,नत्थूसर गेट,जस्सूसर गेट के अंदर,दम्माणी चौक व गोगागेट क्षेत्र में लीलाओं के मंचन होंगे। इस दौरान जहां हिरण्यकश्यप काले वस्त्र एवं मुखौटा धारण कर व हाथ में कोड़ा लेकर भय एवं आतंक का वातारण बनाएगा व लोगों को भयभीत करने का प्रयास करेगा। देर शाम को भगवान नृसिंह मंदिर परिसरों में थम्भ से प्रकट होंगे व हिरण्यकश्यप का वध करेंगे। हिरण्यकश्यप के वध के बाद भगवान नृसिंह की महाआरती की जाएगी व पंचामृत व पंजीरी प्रसाद का वितरण श्रद्धालुओं में किया जाएगा।
तैयारियां हुई पूर्ण
नृसिंह चतृुर्दशी पर्व को लेकर शहर में स्थित विभिन्न नृसिंह मंदिरों में को सभी तैयारियों को अंतिम रुप दिया जा रहा है। भगवान नृसिंह एवं हिरण्यकश्यप के मुखौटों की देखभाल के साथ वस्त्रों की सार संभाल की गई। वहीं मंदिरों में होने वाले पूजन,अभिषेक,श्रृंगार आदि की तैयारियों को पूर्ण किया गया। मंदिरों में बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की गई। वहीं नृसिंह जयन्ती पर श्रद्धालुओं में वितरित किए जाने वाले पंचामृत व पंजेरी महाप्रसाद वितरण की तैयारियों को भी अंतिम रूप दिया गया।
मिट्टी-कुट्टी से बने हैं मुखौटे
श्री नृसिंहजी मंदिर ट्रस्ट लखोटिया चौक के ट्रस्टी मनोज लखोटिया के अनुसार भगवान नृसिंह और हिरण्यकश्यप स्वरूप के मुखौटे रियासतकालीन हैं। ये मुखौटे मुल्तान में बने हुए हैं। मुल्तान अब पाकिस्तान में है। मिट्टी, कागज की लुगदी से ये मुखौटे बनाए जाते हैं। मुखौटों पर सुनहरे रंग से चित्रकारी होती है। इन पर सोने की कलम का काम आकर्षित करता है। भगवान नृसिंह और हिरण्यकश्यप का स्वरूप धारण करने वाले कलाकार इन्ही मुखौटों को पहनकर लीला का मंचन करते हैं। चन्द्रशेखर श्रीमाली के अनुसार लखोटिया परिवार मुल्तान से बीकानेर आए। बीकानेर में भगवान नृसिंह की सेवा भी साथ लेकर लाए। मुखौटे मुल्तान से बनवाए गए। लखोटिया चौक में ट्रस्ट, मोहल्लेवासियों और नृसिंह भक्तों की ओर से हर साल मेले का आयोजन किया जाता है। लखोटिया चौक के अलावा बाकी जगहों पर लीलाओं में सामान्यत: धातुओं के बने होते हैं।

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