जिले में पानी के लिए हाहाकार,जिम्मेदारों के नहीं हो रहे दीदार

तहलका न्यूज,बीकानेर। जिले में तेज गर्मी से हर कोई हलकान है, वहीं पेयजल संकट के दौर में न तो जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और न ही प्रशासन के अधिकारी दिखाई पड़ते हैं। 47 डिग्री के तापमान में जिले में पानी के लिए हाहाकार मचा है, वहीं प्रशासन ने पानी के अपव्यय रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए, इसी का परिणाम है कि जिले भर में पेयजल के लिए प्रशासन को हर दिन रोड जाम, धरना व प्रदर्शन के हालात का सामना करना पड़ रहा है। जिले में पेयजल संकट के चलते लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। लोग तपती दुपहरी में पानी के लिए गर्म सड़कों पर बैठने को मजबूर हैं, वहीं जनता के नुमाइंदे इस दौरान जनता के बीच नजर नहीं आ रहे हैं। इतना ही नहीं प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी भी वहां दिखाई नहीं पड़ते। पुलिस लाइन चौराहे पर पानी की मांग को लेकर लोगों ने जाम लगाकर विरोध दर्ज करवाया। इस दौरान किसी को भी आने जाने नहीं दिया गया। इतना ही नहीं लोगों ने मटकियां फोड़ अपनी भड़ास निकाली। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि एक ओर तो 72 घंटे से पानी की सप्लाई की जा रही है। उसमें भी पर्याप्त जलापूर्ति नहीं होने से पानी के लिये दो दो हाथ करने पड़ रहे है। बाद में सीओ सदर पवन भदौरिया,सदर थानाधिकारी सहित अनेक पुलिस जाब्ता मौके पर पहुंचा और समझाईश कर रास्ता जाम खोलने को कहा। लेकिन भीड़ इस बात को मानने को तैयार नहीं थी। खासी मशक्कत के बाद आखिरकार पानी की आपूर्ति करवाने के आश्वासन के बाद लोगों ने रास्ता खोला।
स्वीमिंग पुल व वाटर पार्क पर प्रशासन ने नहीं की कार्रवाई
जिला मुख्यालय सहित जिले भर में अनेक स्थानों पर स्वीमिंग पुल व वाटर पार्क है। इनमें हर दिन लाखों लीटर पानी जमीन से निकाल कर डाला जा रहा है। लाखों लीटर पानी के अपव्यय पर प्रशासन रोक लगाने की कार्रवाई कर आमजन के उपयोग के लिए भिजवाए तो पेयजल संकट पर क ाफी हद तक काबू पाया जा सकता है। लेकिन पेयजल संकट के दौर में भी प्रशासन ने अब तक जिले में किसी स्वीमिंग पुल व वाटर पार्क पर पानी के अपव्यय को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की है।
पानी का अपव्यय रोकने के लिए प्रशासन ने नहीं चलाया अभियान
जिले में गहराते पेयजल संकट के दौर में भी प्रशासन ने पानी के अपव्यय रोकने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया। सरकारी भवनों से लेकर सरकारी अधिकारियों के भवनों में पानी का खुलेआम अपव्यय दिखाई पड़ता है, लेकिन प्रशासन की ओर से पानी के अपव्यय को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए। निजी क्षेत्र में भी पानी का कार धुलाई और अनेक तरह से अपव्यय हो रहा है, लेकिन प्रशासन ने पानी का अपव्यय रोकने के लिए अब तक न तो कोई अभियान चलाया और न ही कोई ठोस कार्रवाई की।

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