कल घर घर विराजेंगे गणपति,ये होंगे आयोजन

तहलका न्यूज,बीकानेर। प्रथम पूज्य देव भगवान गणेश का प्राकट्य दिवस गणेश चतुर्थी बुधवार को मनाया जाएगा। घर-घर और मंदिरों में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर महाआरती की जाएगी। गणेश चतुर्थी से दस दिवसीय गणेश पूजन उत्सव का आगाज होगा। श्रद्धालु घरों में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर दस दिनों तक पूजा-अर्चना करेंगे। वहीं घर-घर के मुख्य द्वार के ऊपर स्थापित भगवान गणेश की मूर्तियों का तेल, सिंदूर, बर्ग, मालीपाना, धूप, दीप, नैवेद्य, इत्र, रोली, पुष्प आदि पूजन सामग्रियों से पूजन कर मोदक का विशेष भोग लगाया जाएगा।
बाजारों में रही रौनक
गणेश चतुर्थी को लेकर शहर के विभिन्न बाजारों में विशेष रौनक रही। लोगों ने भगवान गणेश की मूर्तियों की खरीदारी की। वहीं गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा अर्चना के लिए विविध पूजन सामग्रियों, श्रीफल, ऋतुफल, बूंदी से बनाए गए मोदक प्रसाद रूप में खरीदे। घरों के मंदिरों को सजाने के लिए विभिन्न प्रकार के सजावटी सामान की भी खरीदारी हुई। मंदिरों और गणेश मूर्तियों को सजाने के लिए रंग बिरंगी रोशनियों, थर्मोकॉल शीट, चमकीले कई रंगों के कागज, सजावटी फूल और पत्तियां आदि की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ रही।
घरों में चलेंगे अभिषेक-पूजन के दौर
गणेश चतुर्थी पर घर-घर में भगवान गजानंद की पूजा-अर्चना होगी। घर-परिवार के सदस्य घरों में स्थापित भगवान गणेश की मूर्तियों का दही, दूध, घी, शक्कर, शहद, केशर से बनाए गए पंचामृत से अभिषेक करेंगे। भगवान गणेश के भजन और स्तुतियों के गायन होंगे। गणेश चतुर्थी को लेकर शुक्रवार को घरों में तैयारियां चलती रही।
अभिषेक-पूजन का विशेष महत्व
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश के अभिषेक और पूजन का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्य पंडित राजेन्द्र किराडू के अनुसार गणेश भक्त भगवान गजानंद की दस दिनों तक विशेष आराधना और पूजन करते है। पंचामृत से अभिषेक अथर्वशीर्ष मंत्रोचार से किया जाएगा और षोडशोपचार पूजन कर भक्त विशेष फल प्राप्ति के लिए गणेश सहस्त्रनामावलि से दन दिनों तक अलग-अलग द्रव्यो यथा मोदक, लाजा, दूर्वा आदि से विशेष पूजन करेंगे।
ऋषि पंचमी पर्व परसों
ऋषि पंचमी पर्व गुरूवार को मनाया जाएगा। इस दिन ऋषियों के पूजन का विशेष महत्व है। श्रद्धालु लोग पवित्र सरोवरों में संध्या, दशविध स्नान, प्रायश्चित संकल्प, हवन, यज्ञापवित, पूजन एवं तर्पण करेंगे। पंडित किराडू के अनुसार इस दिन यज्ञोपवित का पूजन कर साल भर उसी यज्ञोपवित को धारण करते है।दशविध स्नान में गोबर, गोमूत्र, भस्मी, स्वर्ण, धान्य, फल, पंचगव्य, सर्वोषधि, गोरज, कुशोदक आदि से अलग-अलग स्नान करेंगे। ऋषि पंचमी पर कुछ समाज और जातियों में रक्षाबंधन की भी परम्परा है।

 

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