हज जाने वाली पुरानी परम्पराओं का आज भी हो रहा है निर्वहन

तहलका न्यूज,बीकानेर।इन दिनों मक्का मदीना की पवित्र हज यात्रा के लिए जाने वाले हज यात्रियों का इस्तकबाल यानी स्वागत किया जा रहा है ।गौरतलब है कि मुस्लिम समाज में मक्का मदीना की हज यात्रा अहम मानी जाती है 40 दिवसीय पवित्र हज यात्रा के लिए जल्द ही रवानगी शुरू होने वाली है इसलिए सभी हज यात्री हज यात्रा से पहले अपने अपने रिश्तेदारों के यहां पर मिलने के लिए जा रहे हैं। जहां पर उनके रिश्तेदार फूल माला और साफा पहनाकर इस्तकबाल करते हैं और वही सभी रिश्तेदार हज यात्रियों से मक्का मदीना में भारत देश में अमन-चैन,खुशहाली और शांति की दुआओं के लिए कहते हैं। इसी कड़ी में गोगलाव के मोहम्मद हनीफ गौरी अपनी पत्नी के साथ हज यात्रा पर जाने से पहले बीकानेर में अपने रिश्तेदारों से मुलाकात के लिए पहुंचे और बीकानेर में सभी रिश्तेदारों ने इनका इस्तकबाल किया। इस मौके पर सैयद अयूब अली, जाकिर हुसैन, मोहम्मद इकबाल, मकबूल खान, सद्दाम हुसैन, जाकिर अली, अशरफ अली सहित काफी मोहल्ले वासी उपस्थित थे।
क्यों करते हैं स्वागत
बुजुर्ग लोग बताते हैं कि शुरुआत में मक्का मदीना की हज यात्रा पानी के जहाज में की जाती थी और सफर भी 6 महीने का होता था ऐसे में समुंदर में जहाज का कोई भरोसा नहीं था हज यात्रा पर जाने वाले रिश्तेदारों को चिंता सताती रहती थी कि हज यात्री वापस जिंदा लौटेंगे या नहीं । इसीलिए उस समय से यह मिलने की परंपरा चली आ रही है और हज यात्रा में जाने से पहले एक बार अपने रिश्तेदारों से मुलाकात करके गिले-शिकवे, माफ करवाकर हज यात्रा पर जाते थे क्योंकि जिंदगी का कोई भरोसा नहीं था तभी से यह परंपरा मिलने की चली आ रही है।

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