आगामी विधानसभा को लेकर आया चौकाने वाला सर्वे

जयनारायण बिस्सा
तहलका न्यूज,बीकानेर। प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले है,जिसको लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों ने जोर अजमाईश अभी से ही शुरू कर दी है। जहां कांग्रेस चिंतन शिविर के जरिये अपने को टटोल रही है। वहीं भाजपा भी बूथ संकल्प सम्मेलनों के जरिये सता प्राप्ति की जमीन तलाशने में जुट गई है। उधर आप की सक्रियता ने भी दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में हलचल पैदा कर दी है। ऐसे में आगामी विधानसभा के लिये अब सभी दलों का एक लक्ष्य सता प्राप्ति हो गया है। जिसको लेकर कवायद अभी से शुरू कर दी है। बीकानेर तहलका ने चुनाव के मद्देनजर सर्वे शुरू किया है। जिसको लेकर पूरे प्रदेश में अलग अलग जिलों में आने वाली क्षेत्रों में का सर्वे कर हकीकत जानने का प्रयास किया जायेगा। जिसका आगाज बीकानेर जिले से किया गया है। यहां चौकाने वाले तथ्य सामने आएं है। पुन: सताशीन के सपने संजो रही कांग्रेस के लिये जिले की सात विधानसभा सीटों के लिये तहलका न्यूज टीम की ओर से किये गये सर्वे चिंताएं बढ़ाती नजर आ रही है। जिले के पूर्व,पश्चिम ,कोलायत ,लूणकरणसर ,श्रीडूंगरगढ़,नोखा  व खाजूवाला  विधानसभा के हजारों लोगों से की गई रायशुमारी में सामने आया है कि जिले में कांग्रेस को  बढ़ा झटका लगेगा। चुनावों से करीब डेढ़ साल पहले किये गये इस  सर्वे में जिले में कांग्रेस को महज एक या दो सीट की मिलती नजर आ रही है। शेष सीटों पर भाजपा की स्थिति मजबूत दिख रही है।
टिकट वितरण भी बदलेगा समीकरण
उधर लोगों से मिली राय में करीब पांच प्रतिशत लोगों का मानना है कि कुछ सीटों पर टिकट किसको मिलती है,यह भी परिणाम पर निर्भर करेगा। किन्तु आज के हालात में कांग्रेस के हालत पतली है। सर्वे में करीब 70 प्रतिशत लोग बदलाव के पक्ष में नजर आएं। जब टीम ने लोगों से इसका क ारण पूछा तो कार्यकर्ताओं की उपेक्षा व मंत्रियों द्वारा काम नहीं किये जाने की नाराजगी सामने आई है। वहीं 30 प्रतिशत लोग प्रदेश सरकार के कामकाज से खुश तो है,किन्तु अपने चुने हुए प्रतिनिधि से उनकी नाखुशी साफ जाहिर हो रही थी। उन लोगों का मानना था कि कांग्रेस उम्मीदवार बदले तो शायद परिणाम में अन्तर आ सकता है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से भी बढ़ रही है नाराजगी
वहीं कई लोगों द्वारा अनेक जायज मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से भी नाराज है। इन लोगों का कहना है कि गर्मी में पानी की भयंकर समस्या है। तय पर्याप्त जलापूर्ति भी नहीं हो पा रही है। टैंकर सप्लायर्स लूट खसोट कर रहे है। शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं। यहीं हालात सड़क,सफाई,नाजायज हटाएं जा रहे अतिक्रमण,खनन को लेकर है। जहां भी भीड़ जमा होती है। वे जनप्रतिनिधियों को कोसते नजर आते है। विभागों में काम नहीं होने और अधिकारियों द्वारा नहीं सुनने से पार्टी कार्यकर्ता से लेकर पदाधिकारी व पार्षद भी अनेक बार अपनी पीड़ा आकांओं के सामने जाहिर कर चुके है। फिर भी स्थिति वहीं ढाक के तीन पात वाली है।
्रगुटबंदी भी बड़ी समस्या
सर्वे में सामने आया है कि कांग्रेस के लिये गुटबंदी हार का बड़ा कारण होगा। हालांकि मुख्यमंत्री ने तीन मंत्री व चार आयोग के अध्यक्ष बनाकर कुछ हद तक समन्वय बैठाने का प्रयास किया है। फिर भी आपसी खींचतान के चलते सभी नेता अपने समर्थकों के साथ एक दूसरे को नीचे दिखाने का कोई मौका नहीं चूक रहे है। जिसके कई उदाहरण सीएम दौरे व अन्य आयोजनों के समय सामने आ चुके है। वहीं अल्पसंख्यक समाज की इस बार नाराजगी भी कांग्रेस को भारी पडऩे वाली है। पूरे जिले में अल्पसंख्यक समाज के लोग उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से खासे नाराज है और सोशल मीडिया के माध्यम से टिप्पणी कर इस बात का संकेत दे चुके है कि उनकी उपेक्षा अगली चुनाव में कांग्रेस को भारी पड़ेगी। संभवत आप पार्टी का बीकानेर में लगातार हो रहे कार्यक्रम कोई नये राजनीतिक समीकरण की ओर इशारा कर रहे है।
इन सीटों पर खतरा ज्यादा
तहलका न्यूज की टीम ने जो सर्वे किया है उनमें कांग्रेस को बीकानेर पूर्व,बीकानेर पश्चिम,नोखा,श्रीडूंगरगढ़,लूणकरणसर में ज्यादा खतरा है। वहीं कोलायत में भी स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं है। लेकिन इन सभी स्थानों पर भी दोनों पार्टियों के प्रत्याशी भी परिणाम में हेरफेर करने की स्थिति में होंगे। अगर पार्टी पुराने प्रत्याशियों पर ही दावं खेलती है तो कांग्रेस के लिये राह मुश्किल हो सकती है। वहीं भाजपा के लिये भी बीकानेर पश्चिम,खाजूवाला,श्रीडूंगरगढ़,कोलायत में प्रत्याशी को लेकर ऊहापोह के हालात बने हुए है। जहां उन्हें सशक्त प्रत्याशी की तलाश है। वैसे भाजपा ने इसको लेकर अन्दुरूनी सर्वे भी शुरू कर दिया है।

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