शांत राजस्थान बन गया राजनीति का अखाड़ा!

राजस्थान। कांग्रेस में सीएम के विवाद के चलते राजस्थान देशभर में चर्चा का गढ़ बना हुआ है। पहले कांग्रेस अध्यक्ष के लिए अशोक गहलोत का नाम और फिर राजस्थान में 25 सितम्बर को विधायकों के इस्तीफों ने राजस्थान को गपशप का केंद्र बना दिया। पूरे देश की निगाहें राजस्थान पर हैं, क्योंकि अगले पल राजस्थान की राजनीति में क्या होना है, ये कोई नहीं जानता? मगर क्या होना है ये सब जानना चाहते हैं।

राजस्थान की राजनीति में ये उठापटक चंद दिनों से नहीं है। दरअसल पिछले कई वर्षों में राजस्थान में सियासी घमासान चलता ही रहा है। पार्टी कोई भी हो, राजस्थान की राजनीति में हलचल थमती नहीं है। राजस्थान की राजनीति आज केंद्रीय राजनीति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। यही वजह है कि अबसे कुछ वर्षों पहले तक राजनीतिक परिपेक्ष्य से एक सुस्त प्रदेश के रूप में पहचाना जाने वाला राजस्थान आज देश की सियासत में सबसे बड़ा राजनीतिक अखाड़ा बन चुका है। जानते हैं क्यों राजस्थान आज देशभर की सियासत में बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।

वजह एक : अस्थिरता और अनिश्चितत्ता

राजस्थान में 1993 के बाद से राजनीति में एक ट्रैंड चलता आया है। हर पांच साल में सरकार बदलती है और अपने पांच साल पूरे भी करती है। मगर 2018 में बनी कांग्रेस सरकार को लेकर लगातार अस्थिरता रही। मार्च से ही पहले तत्कालीन डिप्टी सीएम सचिन पायलट के दो पदों पर रहने पर सवाल उठने लगे। उसके बाद जुलाई 2020 में सचिन पायलट ने विद्राेह किया और अपने समर्थित विधायकों के साथ मानेसर चले गए। उस दौरान जैसे-तैसे स्थितियां संभली। मगर सरकार को लेकर अनिश्चित्ता बनी रही। अभी हाल ही में विधायकों के इस्तीफे के बाद भी हालात वैसे ही नजर आने लगे।

वजह दो : मजबूत लीडरशिप

राजस्थान में चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों में लीडरशिप बेहद मजबूत है। कांग्रेस में सीएम अशोक गहलोत और बीजेपी में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ऐसे नेता हैं जिन्हें सेंट्रल लीडरशिप ना चाहते हुए भी इग्नोर नहीं कर सकती। दोनों का अपनी-अपनी पार्टी में राजनीतिक कद ऐसा है कि अपने बूते राजनीतिक स्थितियों को बदल सकने में सक्षम हैं। ऐसे नेता देश के अन्य किसी राज्य में दोनों ही पार्टियों में नहीं हैं जो अपनी सेंट्रल लीडरशिप को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।

वजह तीन : टफ कॉम्पीटिशन

राजस्थान एकमात्र ऐसा टू-पार्टी स्टेट है। जहां बीजेपी को वर्तमान हालातों में सबसे ज्यादा चुनौति मिलती रही है। पिछले दो चुनाव से लगातार 25-25 सांसद जीतने के बावजूद बीजेपी यहां कांग्रेस की जड़ो को हिला नहीं पाई। जितना उसने अन्य राज्यों में कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया। उस मुकाबले राजस्थान में बीजेपी कुछ भी नहीं कर पाई। अगर आपसी गुटबाजी को साइड कर दें तो यहां जमीन पर अब भी कांग्रेस की जड़े मजबूत हैं। यही वजह है कि कांग्रेस अन्य राज्यों के मुकाबले यहां बीजेपी को टफ कॉम्पीटिशन देती है।

वजह चार : आपसी गुटबाजी और कलह

राजस्थान में दोनों पार्टियों में लगातार गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर कलह देखने को मिलती रही है। कांग्रेस में यह सामने आ चुकी है। वहीं बीजेपी में यह अंदरखाने नजर आती है। कांग्रेस में जहां अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमे के बीच लगातार तनाव देखने को मिलता है। वहीं बीजेपी में वसुंधरा राजे समर्थित एक अलग खेमा है। वहीं सतीश पूनिया, गुलाबचंद कटारिया समर्थित अलग खेमा है। इसके अलावा सेंट्रल लीडरशिप की पसंद होने के चलते केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और भूपेंद्र यादव के भी अपने समर्थक हैं। जिनके बीच लगातार मतभेद सामने आते रहते हैं।

वजह पांच : प्रभावशाली चेहरे

राजस्थान की दोनों ही पार्टियों में प्रभावशाली राजनीतिक चेहरे हैं। कुछ जहां वर्तमान में अहम पदों पर हैं तो कुछ पार्टियों के भविष्य के सबसे मजबूत दावेदार हैं। फिलहाल लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला राजस्थान से ही हैं। इसके अलावा उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी राजस्थान के ही रहने वाले हैं। हाल ही में राजस्थान के ही अशोक गहलोत देश की सबसे बड़ी पार्टी का अध्यक्ष बनने जा रहे थे। मगर उनकी सीएम बने रहने की इच्छा और 25 सितम्बर को हुए बवाल के चलते वे नहीं बन सके। इसके अलावा नेक्स्ट जनरेशन पॉलिटिशियंस में सचिन पायलट देशभर के युवा नेताओं में सबसे प्रभावशाली और प्रच्चलित चेहरा हैं। वहीं वंसुधरा राजे बीजेपी देशभर की महिला नेताओं में सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिनी जाती हैं।

कांगेस : एकमात्र राज्य जहां सरकार रिपीट होने की उम्मीद

कांग्रेस के लिए राजस्थान इसलिए महत्वपूर्ण है। क्योंकि राजस्थान कांग्रेस शासित सबसे बड़ा राज्य है। इसके अलावा राजस्थान ही वह राज्य है जहां कांग्रेस की जड़े अब भी मजबूत हैं। यहां कांग्रेस की अच्छी पकड़ और मजबूत योजनाओं के बूते कांग्रेस सरकार रिपीट करने के बारे में सोच रही है। इसके अलावा अगर आपसी लड़ाई ना हो तो यहां कांग्रेस के पास अशोक गहलोत, सचिन पायलट, डॉ. सीपी जोशी जैसे कद्दावर नेता और कई मजबूत नेता भी मौजूद हैं। जिनकी कमी कांग्रेस को अन्य राज्यों में खलती है।

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