‘विजय प्रीमियर लीग’ में लगे प्रश्र- उत्तर के चौके-छक्के

 

मां से बढक़र कोई हमदर्द नहीं, पिता से बढक़र हमसफर नहीं- आचार्य श्री विजयराज जी म.सा.

बीकानेर। भक्ति एक है, इसके रूप अनेक हैं। अनेक रूपों में एक रूप माता-पिता के प्रति भक्ति का भाव होना चाहिए। जिनके अंदर यह भाव होते हैं, वह अपने माता-पिता को साता पहुंचाते हैं। जिन लोगों में यह भाव नहीं होते वह उन्हें साता (सुख) नहीं पहुंचा सकते। माता-पिता की सेवा से साता वेदनीय कर्म का बंध होता है। श्री शान्त क्रान्ति जैन श्रावक संघ के 1008 आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने  शनिवार को सेठ धनराज ढ़ढ्ढा की कोटड़ी में साता वेदनीय कर्म के नौंवे बोल भक्ति में रमण करता जीव साता वेदनीय कर्म का बंध करता है विषय पर व्याख्यान दिया। महाराज साहब ने कहा कि हमें समर्पण भाव रखना चाहिए। हम कोई इच्छा करते हैं तो इससे कुछ होता है। इच्छा को निर्णय में बदल देते हैं तो कुछ-कुछ हो जाता है। यदि हम निर्णय को समर्पण में बदल दें तो सब कुछ कर सकते हैं। महाराज साहब ने फरमाया कि एक विचारक ने कहा है- मां से बढक़र दुनिया में कोई हमदर्द नहीं, पिता से बढक़र दुनिया में कोई हमसफर नहीं, मां हमारे लिए जितनी हमदर्द होती है, उतना इस दुनिया में और कोई नहीं होता, यह निश्चित बात है। कोई माने या ना माने यह अलग बात है। आचार्य श्री ने कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि माता-पिता के प्रति समर्पण का भाव होना चाहिए। माता-पिता के प्रति यह भाव होगा तो गुरुओं के प्रति भाव पैदा होता है। आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने फरमाया कि भक्ति एक होती है, इसके रूप अनेक होते हैं। भक्ति का ही एक रूप माता-पिता की सेवा करना है।
जीवन दो दिन रो, पाणी ज्यूं बह जासी
भजन ‘जीवन ओ दो दिन रो,  पाणी ज्यूं बह जासी, लारे जश-अपजश री बातां रह जासी भजन की पं1ितयां सुनाते हुए महाराज साहब ने कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ के संत बुद्धमल जी स्वामी का यह भजन बनाया हुआ है। जैसे पानी बहता है और बह जाता है, ठीक वैसे ही हमारा जीवन है, बीतते-बीतते बीत जाता है। पीछे क्या रह जाता है…?, यश-अपयश रह जाता है। लोग राम-रावण, कृष्ण-कंश, महावीर, गांधी- गोडसे को क्यूं जानते हैं। इनके यश-अपयश के कारण ही तो पहचाने जाते हैं।

गृहस्थी की सार्थकता क्या है…?
आचार्य श्री ने बताया कि एक शब्द में कहें तो गृहस्थी की सार्थकता सेवा है। जिस संतान के मन में यह भाव होते हैं, वही संस्कारी होते हैं। जिनके मन में सेवा के भाव हैं, वह संसारी गृहस्थ जीवन में भी महान आत्मा है, संत है, ऐसे लोगों पर देवता भी प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन बंधुओ, आजकल भक्ति क्यों उठती जा रही है। आज की शिक्षा में विकार आ गया है। बच्चे माता-पिता के साथ रहना  नहीं चाहते, महानगरों में देखा है, मां-बाप को बच्चे वृद्धाश्रम में छोड़ जाते हैं। माता-पिता को फालतू समझते हैं। म.सा. ने कहा बंधुओ, यह याद रखो आज का बच्चा, कल का युवा है, आज का युवा कल प्रोढ़ भी होगा। इसलिए जैसे संस्कार आप अपने भीतर पालोगे, वैसे ही संस्कार आगे तिरोहित होंगे। इसलिए मैं कहता हूं जो अपने उपकारी माता पिता को साता पहुंचाते हैं, उन्हें इस संसार में क्या नहीं मिलता…?, इसलिए समर्पण भाव से, श्रद्धा के साथ सेवा करनी चाहिए, उन्हें सुख पहुंचाना चाहिए।

विजय प्रीमियर लीग का हुआ आयोजन
श्री शान्त क्रान्ति जैन श्रावक संघ के आचार्य विजयराज जी म.सा. के अष्ट दिवसीय जन्मोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार को सेठ धनराज ढ़ढ्ढा की कोटड़ी में धार्मिक ज्ञान प्रतियोगिता विजय प्रीमियर लीग का आयोजन किया गया। चौक में बड़ा सा मैदान, मैदान के बीच मैट, आमने-सामने टीमें और सवालों की गेंद से बल्लों से निकलते रन, हर किसी में रोमांच पैदा कर रहे थे। संघ के अध्यक्ष विजयकुमार लोढ़ा ने बताया कि दो दिवसीय इस प्रतियोगिता के लिए महासती ने आगामों का अध्ययन कर थोकड़ों से पांच सौ प्रश्न तैयार किए हैं। उन्हीं प्रश्नों की प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। युवा संघ के विकास सुखानी ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्धघाटन जैन महासभा के अध्यक्ष लूणकरण जी छाजेड़, अखिल भारतीय शांत क्रान्ति संघ के पूर्व महामंत्री जवरी लाल  बोहरा, वर्तमान महामंत्री रिद्धकरण  सेठिया, बीकानेर संघ के संरक्षक मोतीलाल  सेठिया, अध्यक्ष विजय कुमार  लोढ़ा तथा मंत्री विनोद कुमार  सेठिया ने किया। जिसमें दर्शकों को अलग से प्रश्न भी पूछे गए तथा सही उत्तर देने पर आकर्षक इनाम भी दिए गए। इसके अलावा आज सेमी फाइनल टीम्स की घोषणा की गई, विजेता-उपविजेता टीम को ट्रॉफी कल प्रदान की जाएगी। प्रतियोगिता का फाइनल मैच रविवार को होगा। विकास सुखानी ने बताया कि प्रतियोगिता में आठ टीमें जितेश समरस रॉयल्स, महावीर किंग मेकर्स, हुक्मी चैंपियंस, नाना समता राइजर्स, शान्ति सहिष्णु ब्लास्टर्स, विजय समन्वय मास्टर्स, प्रेम सहज टाइगर्स, पारस सजग चैलेंजर्स के बीच रोचक मुकाबला हुआ। प्रमिला गुलगुलिया, महादेव गुर्जर, रोहित सोनावत तथा कई अन्य खिलाड़ियों का भी प्रदर्शन शानदार रहा। निर्णायक की भूमिका विनिता सेठिया,शुभ बांठिया, ट्विंकल सेठिया की रही। संयोजक अरिहंत बांठिया, अंकित सांड, दर्शना बांठिया थे।

सामूहिक एकासन
अध्यक्ष विजयकुमार लोढ़ा ने बताया कि रविवार को सामूहिक एकासन का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया है।

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