कल्ला जी,इस पर दे ध्यान,कही बिगड़ न जाएं चुनावी सेहत

तहलका न्यूज,बीकानेर। हमें अपनों ने लूटा गेरो में कहां दम था,कश्ती वहां डूबी जहां पानी का बहाव कम था……! ये पंक्तियां कही आने वाले चुनावों में कांग्रेस और शिक्षा मंत्री डॉ बी डी कल्ला के लिये जी का जंजाल न बन जाएं। वर्तमान हालातों में तो ऐसा ही प्रतीत होता दिख रहा है। वजह साफ है..। शिक्षा मंत्री के गृह जिले में बेकाबू होता प्रशासनिक सिस्टम है। एक ओर जहां नगर निगम के अधिकारी की वजह से अपने ही बेगाने बनते जा रहे है। वहीं दूसरी ओर विद्या संबंल योजना बेरोजगारों को संबंल देने की बजाय जख्म दे रही है। इससे नाराजगी का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है,जिसके परिणाम आने वाले चुनावों में कांग्रेस और कल्ला को भोगने पड़ सकते है।
आयुक्त डूबों न दे लुटिया
राजनीतिक जानकारों की माने तो नगर निगम के आयुक्त शिक्षा मंत्री और कांग्रेसजनों में दरारे पैदा करने में बड़ी भूमिका निभा रहे है। मंजर यह है कि निगम में बने भाजपा बोर्ड की मुखिया तो आयुक्त पर आरोप लगाएं वो स्वाभाविक हो सकते है। लेकिन कांग्रेस की सरकार में कांग्रेसी व समर्थित पार्षदों से अशोभनीय बर्ताव ताबूत में अंतिम कील वाली स्थिति पैदा कर रहा है। मजे की बात तो यह है कि इनमें से ज्यादातर पार्षद क ल्ला के समर्थक बताएं जा रहे है। ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हुआ है,पिछले छ:महीनों में आयुक्त और कांग्रेसी पार्षदों में कई बार तनातनी हो चुकी है। इसको लेकर एक बारगी तो मंत्री के भतीजे ने आपसी समन्वय बैठाकर मामला शांत भी करवाया था। किन्तु अपने स्वभाव के आदि आयुक्त ने फिर से वैसी ही हरकतें शुरू कर कांग्रेसी पार्षदों और मंत्री में दरारें पैदा कर दी है। जो अब खाई का काम कर रही है। चुनावी साल में यही हालात रहे तो राजस्थान में फिर से सरकार का सपना संजोए कांग्रेसजनों के हसीन सपने मुंगेरी लाल वाले न बन जाएं।
विद्या संबंल तोड़ रहा बेरोजगारों का संबंल
रिक्त पदों से जूझ रही स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था पटरी पर लाने के उद्देश्य से सरकार ने विद्या संबंल योजना के जरिये गेस्ट फैकल्टी शिक्षण लगाने की व्यवस्था की है। जिसके लिये आवेदन भी लिये जा रहे है। बेरोजगारों को नियुक्तियां देने की जल्दबाजी में सरकार की इस योजना से नाराजगी ज्यादा बढऩे लगी है। जिसकी बड़ी वजह शिक्षाधिकारियों व शिक्षा निदेशालय में आपसी समन्वय की कमी बताया जा रहा है। जानकारी में रहे कि शिक्षा विभाग ने बिना किसी तैयारी के आनन फानन में स्कूलों में रिक्त पदों की सूचियां जारी कर दी और चार नवम्बर तक आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी। किन्तु विभाग ने स्कूलों में रिक्त पदों की वास्तविक हालात को नहीं जाना। स्थिति यह थी कि अनेक स्कूलों में जिन विषयों के रिक्त पदों की सूची जारी की गई। वहीं रिक्त पद थे ही नहीं। ऐसे में आवेदक को इसकी जानकारी नहीं होने से वे दर दर भटकते रहे और सिस्टम को कोसते रहे।कई स्थानों पर कांग्रेस को आगामी चुनाव में सबक सिखाने की बातें करते नजर आएं।
महात्मा गांधी स्कूलों में पदस्थापन,वेतन पुराने स्कूलों से
हालात यह है कि महात्मा गांधी स्कूलों में पदस्थापित किये गये शिक्षकों के वेतन आज भी उनकी पुरानी स्कूलों से ही उठ रहे है। ऐसे में शाला दर्पण पर पदस्थापित होने वाले शिक्षकों को पुरानी स्कूलों में ही बताया जा रहा है। ऐसे में उन स्कूलों में वास्तव में तो पद रिक्त है,किन्तु स्कूल प्रशाासन उसे रिक्त नहीं दिखा रहा है,क्योंकि संबंधित शिक्षक का वेतन उसी स्कूल से उठ रहा है। ऐसे में आवेदक को परेशानी होना लाजमी था। आवेदक इस बात को लेकर नाराज है कि विभागीय समन्वय की कमी का खामियाजा बेरोजगारों को भोगना पड़ा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.