अपने स्वार्थ के लिए सौहार्द नहीं बिगाड़ें, हम सब एक पिता की संतान- सरवड़ी

तहलका न्यूज़,बीकानेर।   हम एक पिता की संतान हैं, एक ही परिवार के लोग हैं और परिवार में भेद काहे का, लेकिन भेद दिख रहा है। जिस प्रकार आज परिवार टूट रहे हैं, अन्य संस्कृतियों के संपर्क में आने के कारण भाई भाई लड़ रहे हैं उसी प्रकार हम भी एक ही पिता की संतान होने के बावजूद बिखर रहे हैं। जो प्रभाव परिवार पर पड़ा है वही सामाजिक ताने बाने के साथ हो रहा है। चिंतन करें कि इस बात का कि हम एक ही पिता की संतान हैं और यही भाव हमारे में सौहार्द पैदा करेगा जो इस सम्मेलन का प्रथम उद्देश्य है। जातियां थीं, जातियां हैं और जातियां रहेंगी लेकिन जातियों में भेद क्यों, इस प्रश्न का उत्तर इस बात को गहराई से समझने में है कि हम एक पिता की संतान हैं और आपस में बंधु है।
लोकतंत्र बहुत ही शुद्ध और सात्विक व्यवस्था मानी जाती है लेकिन हर अच्छी से अच्छी व्यवस्था को विकृत बना लेते हैं और ऐसा ही कर दिया। जातियों के आधार पर बंट गये, वर्गों के आधार पर बंट गये और बंटवारे को मिटाकर एक होने का ही चिंतन करना है। जयपुर में हुए श्री क्षत्रिय युवक संघ के हीरक जयंती कार्यक्रम की चर्चा आपने क तो उसका कारण संघ की 75 वर्षों की तपस्या थी। जिस परिवर्तन के कारण हमें वह समारोह अच्छा लगता है वह परिवर्तन संपूर्ण समाज में नहीं आ पाया, व्यक्तिगत रूप से भी सबमें नहीं आया, कोई दावा नहीं कर सकता कि मैं सर्वश्रेष्ठ बन गया हूं लेकिन फिर भी प्रयास करते रहना चाहिए और उसी कड़ी में यह किसान सम्मेलन आयोजित है। आज हम जो सौहार्द की बात कर रहे हैं वह एक दिन में संभव नहीं इसके लिए भी लंबी यात्रा करनी पड़ेगी। बिगाड़ने में अधिक समय नहीं लगता लेकिन बनाने में बहुत अधिक समय लगता है, बहुत साधन लगते हैं, बहुत परिश्रम लगता है, वह समय, साधन और परिश्रम लगाने के लिए हम तैयार हैं तो ये किसान सम्मेलन भी सफल होंगे और हमारा सौहार्द भी पनपेगा, ये किसानों की समस्याएं भी हल होंगी। सात्विक लोगों का संगठन हो तब ही यह संभव है, सत्य पर चलने वाले लोग एक साथ आयेंगे तब ही यह संभव है। हम जो जय संघ शक्ति बोलते हैं उसका यही अर्थ है कि सात्विक लोग संगठित होवें।किसान काम करता है धरती पर, उस धरती को हम मां मानते हैं तो हमें अपने स्वार्थ के लिए इस धरती की कोख को बिगाड़ने से बचना चाहिए। हर व्यक्ति धनवान बनना चाहता है, सत्तावान बनना चाहते लेकिन ये सब साथ नहीं चलता जबकि साथ चलता है यश, जैसा महाराणा प्रताप का आज चल रहा है। हम यह संकल्प ले लें कि अपने स्वार्थ के लिए सौहार्द नहीं बिगाड़ेंगे तो वह संगठन अस्तित्व में आयेगा जिसके बल पर हमारी सभी मांगे पूर्ण होंगी और हमारा संगठन मजबूत होगा। गणेश वंदना व श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक पूज्य तनसिंह जी के चित्र के आगे दीप प्रज्वलित कर प्रारंभ हुए कार्यक्रम में सबसे पहले इस सम्मेलन की भूमिका बताते हुए संघ के केन्द्रीय कार्यकारी रेवंतसिंह पाटोदा ने कहा कि इस सम्मेलन के दो उद्देश्य किसान और कृषि को आधार बनाकर हमारे सामाजिक ताने बाने में आये बिखराव को दूर करना है और दूसरा उद्देश्य सामाजिक स्तर पर सभी जाति वर्गों के किसानों को एक मंच पर लाकर उनकी बात को सत्ता प्रतिष्ठानों तक पहुंचाना है। किसान शब्द और कृषि व्यवसाय इतना व्यापक है कि इसमें हमारी संपूर्ण ग्रामीण जनसंख्या समाहित हो जाती है। हमारे यहां राजपूत, जाट, मेघवाल, ब्राह्मण, भील, सेन, कुम्हार, मुस्लिम आदि सभी जाति समुदाय के लोग किसान हैं लेकिन विभिन्न कारणों से बंटे हुए हैं, उस बंटवारे को दूर कर सौहार्द बढ़ाने एवं किसान वर्ग की आवाज को मजबूती देने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।इसके अतिरिक्त विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों के रूप में विप्र फाउंडेशन के भँवर पुरोहित, सलीम भाटी, जीव रक्षा विश्नोई सभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवराज विश्नोई, दलित नेता सीताराम नायक, पूर्व यूआईटी चैयरमेन महावीर रांका, जैविक कृषि के किसान भगवानाराम मेघवाल, एससी मोर्चा बीजेपी जिला अध्यक्ष मांगीलाल मेघवाल, उरमूल ज्योति संस्थान के चेतनराम गोदारा, साज़िद सुलेमानी, प्रजापत समाज के प्रतिनिधि अशोक कुमार भोभरवाल, माली समाज के प्रतिनिधि घनश्याम गहलोत, चारण समाज के डॉ कुलदीप बिठु, विमल भाटी वक्ता के रूप में बोले उन्होंने कहा कि श्री प्रताप फाउंडेशन द्वारा सभी जाति समाज धर्म के किसानों को एक जाजम पर बिठाने की जो अनूठी पहल की है वो सराहनीय है। इससे विभिन्न समाजों में बढ़ रही जातिवाद की खाई कम होगी और सभी किसान एक मंच पर आएंगे तो किसानों की समस्याओं के समाधान का रास्ता निकलेगा। किसानों को जातियों और पार्टियों में बांटने के कारण ही सरकारें गंभीरता से नहीं ले रही इसलिए एकजुट होकर किसानों की समस्याओं पर चर्चा का यह आयोजन अभिनव पहल है।
कार्यक्रम में अतिथि के रूप में पूर्व संसदीय सचिव कन्हैयालाल झंवर, लूणकरनसर विधायक सुमित गोदारा, जिला प्रमुख मोडाराम मेघवाल, महापौर सुशीला कँवर, सभा के अध्यक्ष कर्णप्रताप सिंह, पूर्व यूआईटी चैयरमेन मकसूद अहमद, नोखा प्रधान प्रतिनिधि आत्माराम तरड़, बज्जू प्रधान पप्पू देवी तेतरवाल, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष श्याम सिंह बसलपुर, शहर भाजपा जिला अध्यक्ष अखिलेश प्रताप सिंह, देहात भाजपा अध्यक्ष ताराचंद सारस्वत, उप महापौर राजेंद्र पंवार, प्रभुदयाल सारस्वत, कांग्रेस नेता राजेंद्र मुंड, नोखा पूर्व पालिकाध्यक्ष डॉ सीताराम पंचारिया, वाइस चैयरमेन नोखा नगरपालिका निर्मल भूरा, क्षत्रिय सभा के पूर्व अध्यक्ष बजरंग सिंह रॉयल मंच पर उपस्थित रहे।

सम्मेलन की विशेषता यह रही कि इसमें मंच पर राजनेता एवं सामाजिक प्रतिनिधि दोनों उपस्थित रहे लेकिन वक्ता के रूप में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात कही और राजनेता श्रोता के रूप में उपस्थित रहे।

जिला कलेक्टर को सौंपा 15 सूत्रीय मांग पत्र- सम्मेलन के उपरांत एक प्रतिनिधि मंडल ने जिला कलेक्टर से मिल कर सम्मेलन में पारित 15 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा जिसमें बीकानेर जिले के किसानों की विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग की गई। इससे पूर्व सम्मेलन में वरिष्ठ अधिवक्ता भरतसिंह सेरुणा ने मांग पत्र का वाचन किया जिसका सभी ने अनुमोदन किया। ( मांग पत्र संलग्न है)

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