रोज 15 एमएलडी गंदा पानी हो रहा शोधित, निगम न इसे बेच रहा न काम आ रहा

तहलका न्यूज़। बल्लभ गार्डन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से रोज शोधित हो रहे पानी का न उपयोग हो रहा है और ना ही निगम इस शोधित पानी से राजस्व प्राप्त कर पा रहा है। इस शोधित पानी को बरसिंहसर या गुडा थर्मल प्लांट को पाइप लाइनों से देने की योजना भी धरातल पर नहीं आ पा रही है। गंदे पानी का शोधन होने के बाद भी उपयोग नहीं हो पा रहा है। हालांकि निगम की ओर से एक फर्म से रोज कम से कम 8 एमएलडी पानी देने का अनुबंध भी कर रखा है, लेकिन फर्म की ओर से अब तक इस पानी को लेने की प्रक्रिया शुरु नहीं हो पाई है। एसटीपी के तैयार होने व संचालित होने के दो साल से भी अधिक का समय हो जाने के बाद भी निगम प्रशासन इस शोधित पानी को लेकर ठोस योजना पर कार्य नहीं कर पा रहा है।

15 से 17 एमएलडी पानी का रोज शोधन

बल्लभ गार्डन एसटीपी में रोज लगभग 15 से 17 एमएलडी पानी पहुंच रहा है, जिसका एसबीआर तकनीक से ंसचालित हो रहे एसटीपी में शोधन किया जा रहा है। प्लांट से रोज बड़ी मात्रा में गंदे पानी का शोधन होने के बाद भी इसका उपयोग नहीं हो पाना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। बताया जा रहा है कि एसटीपी से शोधित पानी पर निगम का अधिकार है। निगम ही इसका उपयोग अथवा बेच सकता है।

थर्मल प्लांट के लिए अनिवार्य

एसटीपी से शोधित होने वाले पानी का उपयोग थर्मल प्लांट में बड़े स्तर पर हो सकता है। निगम अभियंताओं के अनुसार इसके लिए केन्द्र सरकार की ओर से आदेश भी निकाला हुआ है कि थर्मल प्लांट के 50 किमी के दायरे में िस्थत एसटीपी से शोधित पानी को थर्मल प्लांट को लेना होगा। बल्लभ गार्डन एसटीपी से बरसिंहसर व गुडा थर्मल प्लांट इस एरिया में आने बताए जा रहे है। निगम अधिकारियों की थर्मल प्लांट अधिकारियों से इस संबंध में कई बार वार्ताए होनी भी बताई जा रही है, लेकिन थर्मल प्लांट प्रशासन अब तक एसटीपी से शोधित पानी को अपने प्लांट तक ले जाने के लिए जमीनी स्तर पर कार्य नहीं कर पाए है।

इन क्षेत्रों में काम आ सकता है शोधित पानी

बल्लभ गार्डन एसटीपी एसबीआर तकनीक पर आधारित है। इस प्लांट से शोधित पानी का उपयोग औद्योगिक इकाइयों, गार्डनिंग, घास उगाने, सर्विस सेंटर, साफ-सफाई आदि में हो सकता है। यह पानी पीने के योग्य नहीं है। औद्योगिक इकाइयां भी अब तक इस पानी का उपयोग करने से हिचकिचा रही है।

पानी बिके तो निगम को मिले आय

करीब दो साल से नगर निगम को एसटीपी से शोधित हो रहे पानी से राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है। प्रतिदिन 15 एमएलडी पानी से निगम हर महीनें बड़ी राशि शोधित पानी से प्राप्त कर सकता है। ढि़लाई के कारण निगम को पानी शोधित होने के बाद भी आय नहीं हो रही है।

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