आखिर बीकानेर में हो क्या रहा है,बेलगाम व्यवस्था की कौन करें सार संभाल,जाने लोगों की राय

तहलका न्यूज,बीकानेर। शहर में व्यवस्था को लेकर इन दिनों खासी उथल पुथल हो रही है। जिसके चलते कही विरोध स्वर उठ रहे है तो कही वाही वाही की बातें हो रही है। पर द्धन्द्धा के इस खेल में शहरवासियों के जहन में एक ही प्रश्न उठ रहा है कि आखिर बेलगाम इस व्यवस्था का धणी धोरी कौन। जब जिम्मेदारों ने इससे मुंह मोड़ा तो प्रशासन आधी अधूरे सिस्टम के बीच शहर की सड़कों पर निकल पड़ा। व्यवस्था के इस खेल के बीच आपसी खींचतान के हालात ज्यादा होते जा रहे है। कुछ ऐसी ही परिस्थितियों को लेकर तहलका न्यूज ने आमजन की नब्ज टटोली। न्यूज की टीम ने अलग अलग मोहल्लों में जाकर लोगों से बातचीत की तो कई तथ्य सामने आएं और लोगों की पीड़ा भी उजागर हुई। जो शायद आने वाले चुनावों की दशा व दिशा को भी तय करेगी। तहलका की टीम ने इन दिनों शहर में हो रही उथल पुथल पर लोगों की रायशुमारी की। तो सामने आया कि सिस्टम में अपने आपकी सर्वेश्रेष्ठता का नुकसान शहर को हो रहा है। कुछ कार्यवाहियों पर शहरवासी अधिकारियों की पीठ थपथपाते नजर आएं तो कुछ पर जमकर भड़ास भी निकाली। उन सभी मुद्दों पर पेश है एक रिपोर्ट।
अतिक्रमण कार्यवाही
वैसे तो अतिक्रमण की कार्यवाही पर अनेक लोगों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। लेकिन संभाग के मुखिया का इस बात के लिये धन्यवाद भी दिया। किन्तु हमेशा की तरह सीमित दायरों में अतिक्रमण हटाने पर कार्यवाही को कोसा भी। ज्यादातर लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर बिना सूचना के ही निगम ने कार्यवाही की। जबकि कई ऐसे स्थान अछूते रह गये। जहां प्रशासन हमेशा की भांति हिमाकत तक नहीं दिखा रहा। अगर वास्तव में ही अतिक्रमण मुक्त शहर की कल्पना जिला प्रशासन चाहता है तो उन्हें आमजन व व्यपारियों को विश्वास में लेकर यह काम करना चाहिए था। आनन फानन में प्रदेश सरकार के सामने अपनी प्ररफोरमेन्स दिखाने के लिये की गई कार्यवाही में पैसा व समय की बर्बादी भी की गई है। जिसके अनेक उदाहरणों में सरकार की किरकिरी भी हुई है। वहीं कुछ लोगों ने मोहल्ला विशेष में कार्यवाही नहीं करने पर संभागीय आयुक्त व निगम प्रशाासन को आड़े हाथों भी लिया। उधर जनप्रतिनिधियों को भी ऐसे सकारात्मक कार्य में तवज्जो नहीं देने पर पत्रवार की भी चर्चा इस सर्वे के दौरान रही। निगम महापौर व आयुक्त के बीच चल रही कमशकश पर भी लोगों ने चिंता जताई कि एक चुने हुए जनप्रतिनिधि की आयुक्त द्वारा किसी बात को न मानना ओर उन्हें सूचित नहीं करना लोकतंत्र के लिये शुभ संकेत नहीं है। इसके लिये लोगों ने स्थानीय मंत्रियों व नेताओं को दोषी माना। लोगों का कहना है कि लालफीताशाही अब इनके बस में नहीं है।
वन वे व्यवस्था को सराहा
उधर शहर के मुख्य मार्गों पर की गई वन वे व्यवस्था की सराहना लोगों ने की है। लोगों का मानना है कि इससे राहत जरूर मिली है,किन्तु इन स्थानों पर की गई ई रिक्शा की अनुपलब्ता पर भी सवाल उठाएं। कई लोगों ने कहा कि शहर के मुख्य मार्गों के साथ साथ ऐसे ओर स्थान चिन्हित कि ये जाने चाहिए थे। जहां वास्तव में यातायात का दबाव रहता है और एक नियोजित रूपरेखा से काम किया जाना चाहिए था। पर वैसा नहीं हुआ। जिससे व्यापारी वर्ग व इन स्थानों पर रहने वाले कुंठित है।
आम आदमी की आवश्यकता पर ध्यान ही नहीं
बहुतायत लोगों का मानना है कि शहर की व्यवस्था अतिक्रमण हटाने,यातायात व्यवस्था सुचारू करने से सही नहीं होगी। आम आदमी की जरूरत के लिये संभाग के मुखिया का ध्यान नहीं जा रहा है। नहरबंदी के दौरान जलापूर्ति को लेकर कोई समूचित प्रबंध न तो प्रशासन कर पाया और न ही सरकार के मंत्री और नेता। विपक्षी दल भी महज समाचार पत्रों की सुर्खियों तक ही सीमित रहे। लोगों ने पानी के टैंकरों से जलापूर्ति की ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। टैंकर वाले मुंह मांगी राशि वसूलते गये और सरकार की ओर से निर्धारित राशि के आदेश हवा हो गये। यहीं नहीं जलदाय विभाग की ओर से लगाएं गये पानी के टैंकर से पर्याप्त जलापूर्ति तक नहीं हुई। जिला प्रशासन की ओर से एक दो बार डिकॉय ऑपरेशन कर इतिश्री कर ली गई। देर रात तक अभियंताओं के कहे स्थानों पर जलापूर्ति कर रहे टैंकरों की धरपकड़ तक नहीं हुई। लोगों के पास इस बात के पुख्ता सबूत है कि अभियंताओं ने अपने चित परिचितों के यहां नि:शुल्क पानी के टैंकर भिजवाकर उन्हें अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया है और जरूरत वाले स्थानों पर पानी की सप्लाई तक नहीं हुई। ऐसे में संभाग के मुखिया को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए।
बदहाल है सड़कों के हालात
अपनी भड़ास निकालते हुए लोगों ने तहलका की टीम को कहा कि कुछ कार्यवाहियों में वाहीवाही लूटने वाले प्रशासन के अधिकारी अगर सड़कों की बदहाली की ओर भी ध्यान देते है तो शहर की सूरत बदल सकती है। कई टेक्सों के जरिये उनसे की जा रही वसूली के बाद भी लगभग शहर के हर क्षेत्र की सड़क छलनी है। जिससे वाहन व पैदल चालकों को दिक्कतें होती है। सानिवि विभाग की ओर से शहर में बनाई सड़कों में गड़बड़झाला किया गया। जिसकी जांच करने की बजाय विभाग के मुखिया का तबादला कर महज दिखावा किया गया। हकीकत में इस मुद्दे पर राजनेता व प्रशासन बिल्कुल मौन बैठा है। हां मीटिंगों में जरूर चर्चा होती है,शहर के हालात को सुधारने की।
आवारा पशुओं व देर रात तक बिकने वाली शराब पर कोई एक्शन
सर्वे में सामने आया है कि इन दिनों महज प्रशासन का कुछ ही बिन्दुओं पर फोकस कर रहा है। शहर के लिये नासूर बने आवारा पशु व देर रात तक शराब बेचने वालों पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं। क्योंकि शराब से राज्य का राजस्व ज्यादा आ रहा है। बातचीत में खुलकर बोले लोगों का कहना है कि निगम पहले जिले में साफ-सफाई,सीवरेज सिस्टम,आवारा पशुओं की समस्याओं को तो हल करें। यह नहीं कि अतिक्रमण गलत हटाएं पर केवल इस पर फोकस करना भी तो सही नहीं। निगम आयुक्त राजस्व इकठ्ठा कर निगम की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बजाय राजनीतिक दखलअंदाजी के जरिये निगम को सुर्खियों में ला रहे है। प्रशासन को आवारा पशुओं को गौशालाओं में भेजने तथा देर रात तक बिकने वाली शराब की ओर भी ध्यान देने की जरूरत है। लोागों का कहना है कि प्रशासन की पहल का वे स्वागत करते है किन्तु प्रशासन सभी से समन्वय बैठाकर काम करें तो सभी भागीदार होकर उनका सहयोग भी करेंगे।

अधिकारियों के रवैये की भी लगे क्लास
लोगों का कहना है कि प्रशासन को प्रशासन के अधिकारियों का रवैया भी संवेदनशील होना चाहिए। कई विभाग के अधिकारी कार्यालयों में जनता की सुनवाई नहीं करते। अगर कार्यालय में मिल जाएं तो सीधे मुंह बात नहीं करते। रायशुमारी ने सर्वोधिक शिकायतें नगर निगम,नगर विकास न्यास,जलदाय विभाग,बिजली कंपनी,सानिवि,सामाजिक अधिकारिता विभाग,पीबीएम की सामने आई है। यानि ये वे विभाग है तो जहां आमजन का सीधा वास्ता रहता है।

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