21 साल… अब पार्षद पति असली सरकार

जयपुर। शहरी सरकारों (नगरीय निकाय) में महिला पार्षदों (निर्वाचित) के पति, परिजन, रिश्तेदारों का दखल बढ़ता जा रहा है। इसे रोकने के लिए सरकार 21 साल से जूझ रही है, लेकिन सफलता नहीं मिली। नतीजा, पार्षद पति, परिजन निकायों की बैठकों में पहुंचकर मनमानी करते गए। कई जगह मामला झगड़े और निलंबन तक पहुंच गया। अब सरकार इन पर एक्शन के मूड में है और सख्ती बरतने के आदेश जारी किए हैं।इन आदेशों के तहत महिला पार्षदों (निर्वाचित) के पति, परिजन, रिश्तेदारों को किसी भी सूरत में निकाय गतिविधि में दखल की अनुमति नहीं होगी। ऐसा हुआ तो संबंधित अधिकारी, कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। स्वायत्त शासन विभाग ने इसके आदेश जारी किए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि सरकार ने अफसरों की जवाबदेही तो तय कर दी, लेकिन जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को सबक सिखाने का कोई मैकेनिज्म नहीं सुझाया।
ऐसा एक्शन हो तो बने बात
स्वायत्त शासन विभाग ने दो दिन पहले मालपुरा नगर पालिका अध्यक्ष सोनिया सोनी को निलंबित किया। मामले की जांच की गई, जिसमें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दर्ज आपराधिक मामले में तथ्यों और अध्यक्ष के कार्य में पति का हस्तक्षेप करना साबित हुआ है।
महिला पार्षद खुद एक्टिव हों
राजस्थान में नगर पालिका के चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण है। स्वायत्त शासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आदेश के पीछे उनका मंतव्य यही है कि जनता ने उन्हें चुना है तो महिला पार्षद खुद सक्रिय हों। निगम की कार्य प्रणाली खुद समझें।

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